भुवनेश्वर : राजभाषा हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार, प्रगतिशील प्रयोग एवं प्रभावी क्रियान्वयन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “प्रथम अंतरराष्ट्रीय राजभाषा वार्षिक शिखर सम्मेलन, ओडिशा–2026” का आयोजन सीएसआईआर–खनिज एवं पदार्थ प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर–आईएमएमटी), भुवनेश्वर में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, भुवनेश्वर (कार्यालय–02), नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, भुवनेश्वर (उपक्रम) एवं नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, भुवनेश्वर (बैंक) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस गरिमामय आयोजन में महामहिम डॉ. हरि बाबू कंभमपति, माननीय राज्यपाल, ओडिशा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. रामानुज नारायण, निदेशक, सीएसआईआर–आईएमएमटी एवं अध्यक्ष, नराकास भुवनेश्वर (कार्यालय–02), श्री बृजेंद्र प्रताप सिंह, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, नालको एवं अध्यक्ष, नराकास भुवनेश्वर (उपक्रम), श्री राकेश कुमार यादव, मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक, स्थानीय प्रधान कार्यालय, भुवनेश्वर एवं अध्यक्ष, नराकास भुवनेश्वर (बैंक), तथा डॉ. बिपिन कुमार, सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति, वित्त मंत्रालय तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सम्मेलन के प्रमुख वक्ताओं में श्री राजेश श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक (राजभाषा), गृह मंत्रालय, भारत सरकार; श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच, सीईओ, एल्गो टेक्नोलॉजीज, दुबई तथा पूर्व निदेशक–माइक्रोसॉफ्ट एशिया; प्रो. (डॉ.) पुनीत कुमार द्विवेदी, प्रोफेसर एवं ग्रुप डायरेक्टर, ऑक्सफोर्ड इंटरनेशनल कॉलेज, इंदौर; डॉ. राजीव कुमार रावत, वरिष्ठ हिंदी अधिकारी, आईआईटी खड़गपुर; प्रोफेसर (डॉ.) सोमा बंद्योपाध्याय, हिंदी विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय एवं पूर्व कुलपति, बाबासाहेब अंबेडकर शिक्षा विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल; तथा डॉ. विवेक मणि त्रिपाठी, एसोसिएट प्रोफेसर, हिंदी विभाग, क्वांगतोंग विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, चीन शामिल रहे। लगभग 500 प्रतिभागियों ने सम्मेलन में सहभागिता की, जिनमें ओडिशा सहित कोलकाता, रांची, पटना, बिहार, झारखंड तथा पूर्वी भारत के विभिन्न क्षेत्रों से केंद्र सरकार के कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, बैंकों एवं अन्य संस्थानों के अधिकारी-कर्मचारी, राजभाषा अधिकारी, शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं भाषा विशेषज्ञ शामिल थे। सम्मेलन में राजभाषा हिंदी के प्रगतिशील प्रयोग, प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रभावी उपयोग, तकनीकी एवं डिजिटल युग में हिंदी की संभावनाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा हिंदी के अंतरराष्ट्रीय विस्तार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने भारत की भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता, भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन तथा शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और डिजिटल माध्यमों में भारतीय भाषाओं के बढ़ते प्रयोग पर बल दिया। गैर-हिंदी भाषी क्षेत्र ओडिशा में आयोजित यह सम्मेलन इस बात का सशक्त प्रतीक रहा कि राजभाषा हिंदी का प्रभाव, स्वीकार्यता एवं प्रयोग हिंदीतर राज्यों में भी निरंतर बढ़ रहा है।
डॉ बिपिन कुमार ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर क्षेत्रीय भाषा और राष्ट्रीय स्तर राष्ट्रीय भाषा हिंदी होनी चाहिए। हम सभी भारतीय भाषाओं का सम्मान करते हैं। भाषाएँ एक दूसरे से जोड़ती है। विश्व हिंदी परिषद का मूल उद्देश्य भी यही है कि वह भारत के सभी क्षेत्रीय भाषाओं को साथ लेकर हिंदी को विश्व पटल पर स्थापित हो। इस कार्यक्रम में श्री नन्दकिशोर साह, ओड़िशा प्रांत के अध्यक्ष श्री विक्रमादित्य सिंह, ओड़िशा प्रांत के महामंत्री श्री गोबिंद चौधरी, श्री उमेश प्रजापति, श्री अकाश श्रीवास्तव, श्रीमती स्नेहलता दास, श्री अबिनाश दाश, श्री भगवान बेहरा, सुश्री मौसम तिवारी आदि भी कार्यक्रम के साक्षी बने वहीं श्री नन्दकिशोर साह को हिंदी में अतुलनीय योगदान के लिए भाषा रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया।
पूर्वी भारत के विभिन्न राज्यों से लगभग 500 प्रतिभागियों की सहभागिता ने हिंदी के प्रति बढ़ती रुचि एवं स्वीकार्यता को प्रदर्शित किया तथा भारतीय भाषाओं के बीच संवाद, समन्वय एवं सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का संदेश दिया। यह सम्मेलन इस बात का भी सशक्त प्रतीक है कि सीएसआईआर–आईएमएमटी केवल क्रिटिकल मिनरल्स, खनिज एवं पदार्थ प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ही अपनी पहचान स्थापित नहीं कर रहा है, बल्कि राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार, प्रगतिशील प्रयोग एवं प्रभावी क्रियान्वयन के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य अतिथियों के आगमन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसके पश्चात दीप प्रज्वलन, मंगलाचरण, अतिथि सम्मान, विभिन्न वक्ताओं के संबोधन एवं पुरस्कार वितरण आयोजित किए गए।
सम्मेलन के उपरांत महामहिम राज्यपाल ने सीएसआईआर-आईएमएमटी की प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया तथा विशिष्ट अतिथियों के साथ पौधारोपण कार्यक्रम में भी सहभागिता की। कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय मंच संचालन श्री आकाश श्रीवास्तव, कनिष्ठ हिंदी अनुवादक, सीएसआईआर–आईएमएमटी, भुवनेश्वर एवं सदस्य सचिव, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, भुवनेश्वर (कार्यालय–02) द्वारा किया गया। सम्मेलन ने विभिन्न सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, बैंकों, शिक्षण संस्थानों तथा भाषा एवं साहित्य जगत को एक साझा मंच प्रदान करते हुए राजभाषा हिंदी के बढ़ते प्रभाव, भारतीय भाषाओं के बीच संवाद तथा तकनीकी युग में हिंदी के व्यापक उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।
